कॉलेज एडमिशन के दस्तावेज़ तैयार करना

एडमिशन और काउंसलिंग की सीट भरने का समय कम होता है, और उसी समय पोर्टल आठ-दस दस्तावेज़ माँग लेता है। काग़ज़ आपके पास होते हैं — फँसते वहाँ हैं जहाँ मोबाइल की तस्वीर को साफ़ PDF बनाना होता है।

यह पेज उसी हिस्से पर है: स्कैन, जोड़ना, क्रम और साइज़।

दस्तावेज़ स्कैन करें

आम तौर पर क्या माँगा जाता है

  • दसवीं और बारहवीं की मार्कशीट और प्रमाणपत्र
  • स्थानांतरण प्रमाणपत्र और चरित्र प्रमाणपत्र
  • प्रवेश परीक्षा का स्कोरकार्ड और रैंक कार्ड
  • आधार या अन्य पहचान पत्र
  • श्रेणी, निवास और आय प्रमाणपत्र, जहाँ लागू हो
  • शुल्क भुगतान की रसीद

क्रम से यह करें

  1. मोबाइल से खींची मार्कशीट टेढ़ी है और उस पर हाथ की छाया है।

    स्कैनर काग़ज़ के किनारे पहचानता है, टेढ़ापन सीधा करता है और रोशनी ठीक करता है।

    मोबाइल से दस्तावेज़ स्कैन करें
  2. हर दस्तावेज़ की अलग तस्वीर है, पोर्टल PDF माँग रहा है।

    तस्वीरों को क्रम में लगाकर एक PDF बना लें।

    तस्वीरों से PDF
  3. मार्कशीट के दो पन्ने दो अलग फ़ाइलों में हैं।

    दोनों को एक फ़ाइल में जोड़ें, क्रम आपके हाथ में रहेगा।

    PDF जोड़ें
  4. जोड़ने के बाद क्रम पोर्टल की सूची से मेल नहीं खा रहा, और एक पेज उल्टा है।

    पेज खींचकर क्रम बदलें, उल्टे पेज को घुमाएँ और ख़ाली पेज हटा दें।

    पेज का क्रम ठीक करें
  5. फ़ाइल सीमा से बड़ी है और अपलोड नहीं हो रही।

    अपनी सीमा लिखें और टूल उसी साइज़ तक ले आएगा, पढ़ने योग्य रखते हुए।

    PDF का साइज़ घटाएँ
  6. पुरानी मार्कशीट से नंबर फ़ॉर्म में टाइप करने हैं।

    तस्वीर से लिखा हुआ पढ़ लें और कॉपी कर लें, हाथ से टाइप करने की ज़रूरत नहीं।

    तस्वीर से टेक्स्ट निकालें

काम आने वाली बातें

  • नाम की हिज्जे हर काग़ज़ पर एक जैसी होनी चाहिए। दसवीं और बारहवीं में एक अक्षर का फ़र्क़ काउंसलिंग में रुकावट बन जाता है।
  • पोर्टल की सूची के क्रम में ही फ़ाइल लगाएँ — जाँचने वाला सूची के हिसाब से देखता है।
  • फ़ाइल के नाम साफ़ रखें: marksheet-12.pdf, scan_0043.pdf से बेहतर है।
  • मुहर या हस्ताक्षर वाले काग़ज़ को बहुत छोटा न करें। सबसे पहले मुहर ही धुँधली होती है।
  • काउंसलिंग की तारीख़ से पहले सब फ़ाइल तैयार रखें। सीट भरते समय स्कैन करने का समय नहीं मिलता।

सामान्य सवाल

अपलोड की साइज़ सीमा कितनी है?

हर विश्वविद्यालय और हर काउंसलिंग पोर्टल की सीमा अलग है, और वह हर सत्र में बदलती रहती है। सीमा प्रॉस्पेक्टस या अपलोड पेज पर लिखी होती है — वही नंबर टूल में डालें। सीट भरने के दबाव में अंदाज़े से काम न करें।

JPG चलेगा या PDF ही देना होगा?

यह पोर्टल पर निर्भर है। अगर साफ़ लिखा है PDF, तो तस्वीर रिजेक्ट हो जाएगी। अगर स्पष्ट न हो तो PDF सुरक्षित रहता है — पेज का क्रम बना रहता है और उसमें बदलाव आसानी से नहीं होता।

स्कैनर की दुकान से बेहतर स्कैन मोबाइल से हो सकता है?

सादे काग़ज़ के लिए हाँ, अगर रोशनी ठीक हो। टूल किनारे काटकर, टेढ़ापन सीधा करके और पृष्ठभूमि साफ़ करके ऐसी फ़ाइल देता है जो मूल तस्वीर से साफ़ भी होती है और छोटी भी।

क्या इसके लिए खाता बनाना पड़ेगा?

स्कैन, जोड़ना, क्रम बदलना और साइज़ घटाना — इनके लिए नहीं। सब मुफ़्त है और मोबाइल ब्राउज़र में चलता है।

स्कैन से शुरू करें

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